Sunday, 21 October 2012

सेक्स का अर्थ

सेक्स का कोई शाब्दिक अर्थ नहीं है, दूसरा हर कोई इसे करना चाहता है. सेक्स का आशय सिर्फ जननेद्रियों से पूर्णतः संबंधित नहीं है. सेक्स का आशय उस बोधगम्य महत्वपूर्ण उद्यम से है जिस पर ईमानदारी से मूल्य लगाया जाय तो यह बहुमूल्य अभ्यास हो सकता है. सेक्स को महसूस किया जा सकता है पर परिभाषित नहीं किया जा सकता सेक्स करना और सेक्स को समझना दो अलग-अलग कार्य हैं. यह ठीक उसी तरह है जिस तरह भोजन करना और पोषण या पाचन क्रिया को समझना है. सेक्स सिर्फ सहवास तक सीमित नहीं है और न ही इसे जननेद्रियों के क्रिया कलापों तक सीमित किया जा सकताहै. वास्तव में सेक्स चंचलता का विशाल दायरा है. इस तरह इसका कोई शब्दार्थ नहीं है बल्कि यह सिर्फ एक अनुभूति है जो अलग-अलग लोगों को अलग-अलग तरीके से मिलती है. वहीं इसका दूसरा अर्थ पऱकृति से उस रिश्ते से लगाया जा सकता है जिसकी अनुभूति से मन को एक संतुष्टि मिलती है चाहे वह जननेन्द्रियों से मिले या किसी अन्य वस्तु, सोच, नामकरण या क्रिया कलापों से. कुल मिलाकर यह एक शब्द की अनुभूति है. इसलिएअब चलिए सेक्स की एक नई यात्रा पर दूसरी ओर एक नए अर्थ में जिस कार्य के बाद शरीर को एक नए आनंद की अनुभूति होती है वह सेक्स है. जो दिमाग से चलकर जनन इन्द्रियों द्वारा आत्मानंद को प्राप्त करता है. इस दौरान शरीर के हर अंग अपना अलग अलग महत्व रखते हुए अपनी सहभागिता निभाते है. सेक्स शब्द के अर्थ में कई शब्दार्थ समाहित रहते हैं. जिनमे मित्रता, दृढ़ परिचय, घनिष्टता, आनंद, उत्पादकता, शारीरिक सम्पूर्णता और वह विश्वास की जिंदगी सही है. सेक्स का लाक्षणिक अर्थ है यथार्थता और यह धर्म तथा रीति के निबंधो के तहत चलती है. एक विद्वान का मत है कि सेक्स मूलतः शरीर में ही विद्यमान है. यह एक अरैखिक अनुभव है. सेक्स का विश्लेषण अनुभूति आदि तो किया जा सकता है किन्तु सेक्स करना और समझना दोनों अलग-अलग कार्य हैं. वहीं कुछ का मानना है कि एक ऐसी कल्पना जिसे हर कोई आनंद के लिए पाना चाहता है सेक्स कहलाती है. दूसरी ओर आधुनिक ख्याल के लोगों के अनुसार असीम आनंद की अनुभूति के लिए दो विपरीत या समान लिंग वालों द्वारा शरीर के कुछ विशेष अंगों द्वारा की जाने वाली क्रियाएं सेक्स कहलाती हैं. इन सबके विपरीत शब्दकोश में दिये गए शाब्दिक अर्थों पर जाएं तो उसका मतलब लिंग, स्त्री पुरुष भेद, काम क्रिया, यौन क्रिया, संभोग, सहवास आदि है.
सेक्स के समय \'आसनों\' का प्रयोग करना यकीनन आनंदवर्धक होता है पर योग्य जानकारी के बगैर कठिन आसनों को करना सुरक्षित नहीं कहा जा सकता।सेक्स के तुरंत बाद पानी पीना उचित नहीं है। हाँ, सेक्स की समाप्ति पर मिठाई या मिश्री, गुड़ आदि खाना चाहिए और कुछ रुककर जल का सेवन करना लाभदायक है।सेक्स के तुरंत बाद हवा में निकलना हानिकारक है।अपनी उम्र से ज्यादा और उम्र से कम स्त्री से सहवास न करना ही उत्तम है। इसी प्रकार एक से ज्यादा स्त्रियों से सेक्स करने की आज्ञा भी शास्त्र हमें नहीं देते।सेक्स में कई लोग भ्रमवश अपने आपको कमजोर मानते हैं और इसलिए तरह-तरह की ऊटपटांग इश्तिहारी औषधियों का सेवन करने लगते हैं। ऐसा करके अपनी प्राकृतिक क्षमता को न खोएँ । जब आपको विश्वास हो जाए कि वाकई आप में कोई कमजोरी है तो पहले किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लें और फिर उसके अनुसार ही इलाज करें।कुछ लोग सेक्स को इस हद तक जरूरी मानते हैं कि भले ही उनका पार्टनर ठंडा पड़ा हो या वह अन्य किसी कठिन परिस्थिति से गुजर रहा हो, वे सेक्स करते ही हैं। यदि हसबेंड-वाइफ में से कोई भी क्रोध, चिंता, दुःख, अविश्वास आदि किसी भी मानसिक समस्या से गुजर रहा हो, तो सेक्स करना उचित नहीं है। यानी सहवास उसी समय परम आनंददायक होता है, जब पति-पत्नी दोनों पूर्ण प्रसन्न चित्त हों। 

रजोधर्म/माहवारी क्या है?

10 से 15 साल की आयु की लड़की के अण्डकोष हर महीने एक विकसित अण्डा उत्पन्न करना शुरू कर देते हैं। वह अण्डा अण्डवाही नली (फालैपियन ट्यूव) के द्वारा नीचे जाता है जो कि अण्डकोष को गर्भाषय से जोड़ती है। जब अण्डा गर्भाषय में पहुंचता है, उसका अस्तर रक्त और तरल पदार्थ से गाढ़ा हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है कि यदि अण्डा उर्वरित हो जाए, तो वह बढ़ सके और शिशु के जन्म के लिए उसके स्तर में विकसित हो सके। यदि उस अण्डे का पुरूष के वीर्य से सम्मिलन न हो तो वह स्राव बन जाता है जो कि योनि से निष्कासित हो जाता है।माहवारी चक्र की सामान्य अवधि क्या है?
माहवारी चक्र महीने में एक बार होता है, सामान्यतः 28 से 32 दिनों में एक बार।
मासिक धर्म/माहवारी की सामान्य कालावधि क्या है?
हालांकि अधिकतर मासिक धर्म का समय तीन से पांच दिन रहता है परन्तु दो से सात दिन तक की अवधि को सामान्य माना जाता है।

माहवारी मे सफाई कैसै बनाए रखें?
एक बार माहवारी शुरू हो जाने पर, आपको सैनेटरी नैपकीन या रक्त स्राव को सोखने के लिए किसी पैड का उपयोग करना होगा। रूई की परतों से पैड बनाए जाते हैं कुछ में दोनों ओर अलग से (Wings) तने लगे रहते हैं जो कि आपके जांघिये के किनारों पर मुड़कर पैड को उसकी जगह पर बनाए रखते हैं और स्राव को बह जाने से रोकते हैं।
सैनेटरी पैड किस प्रकार के होते हैं?
भारी हल्की माहवारी के लिए अनेक अलग-अलग मोटाई के पैड होते हैं, रात और दिन के लिए भी अलग- अलग होते हैं। कुछ में दुर्गन्ध नाषक या निर्गन्धीकरण के लिए पदार्थ डाले जाते हैं। सभी में नीचे एक चिपकाने वाली पट्टी लगी रहती है जिससे वह आपके जांघिए से चिपका रहता है।
पैड का उपयोग कैसे करना चाहिए?
पैड का उपयोग बड़ा सरल है, गोंद को ढकने वाली पट्टी को उतारें, पैड को अपने जांघिए में दोनों जंघाओँ के बीच दबाएं (यदि पैड में विंग्स लगे हैं तो उन्हें पैड पर जंघाओं के नीचे चिपका दें)
पैड को कितनी जल्दी बदलना चाहिए?
श्रेष्ठ तो यही है कि हर तीन या चार घंटे में पैड बदल लें, भले ही रक्त स्राव अधिक न भी हो, क्योंकि नियमित बदलाव से कीटाणु नहीं पनपते और दुर्गन्ध नही बनती। स्वाभाविक है, कि यदि स्राव भारी है, तो आप को और जल्दी बदलना पड़ेगा, नहीं तो वे जल्दी ही बिखर जाएगा।
पैड को कैसे फेंकना चाहिए?
पैड को निकालने के बाद, उसे एक पॉलिथिन में कसकर लपेट दें और फिर उसे कूड़े के डिब्बे में डालें। उसे अपने टॉयलेट मे मत डालें - वे बड़े होते है, सीवर की नली को बन्द कर सकते हैं

स्वप्न दोष (Night fall) कोई बीमारी नहीं है

मुझे कई सवालों भरे मेल आए जिसमें से 60 फीसदी सवालों में स्वप्न दोष बंद करने की जानकारी मांगी गई थी या फिर उसका कोई इलाज पूछा गया था कुछ ने तो यहां तक बताया कि जिस डॉक्टर से वे इलाज करा रहा है उसकी दवा काफी महंगी है कुछ उपाय बताएं कि स्वप्न दोष न हो... आदि-आदि... इससे यह पता चलता है कि आज की युवा व किशोर पीढ़ी किस हद तक अज्ञानता की शिकार है. ये स्वप्न दोष जैसी सामान्य शारीरिक क्रिया को बीमारी मान लेते हैं और नीम हकीम इसी का नाजायज फायदा उठा कर युवाओं को ठगते हैं. यहां हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि स्वप्न दोष कोई बीमारी नहीं है बल्कि यह एक सामान्य शारीरिक क्रिया है. चूंकि शरीर में वीर्य का सतत् निर्माण होता रहता है और शरीर से यह वीर्य बाहर सिर्फ तीन तरीकों से आता है-1. सेक्स द्वारा
2. हस्तमैथुन द्वारा
3. स्वप्न दोष द्वारा
अब यदि सेक्स व हस्तमैथुन द्वारा वीर्य शरीर से बाहर नहीं आता है तो सामान्यतौर पर यह स्वप्न दोष के तरीके से शरीर से बाहर आता है. इसलिये जो लोग सेक्स या हस्तमैथुन नहीं करते हैं या काफी अंतराल में करते हैं उन्हे स्वप्न दोष की शिकायत हो सकती है. लेकिन यह सामान्य प्रक्रिया है. दरअसल जब किशोर में वीर्य बनने की प्रक्रिया प्रारंभ होती है तो उससे बाह्य तौर पर जानकारी तो नहीं मिलती साथ ही जब उसका शुक्राशय वीर्य से भर जाता है तो वह वीर्य बाहर आ जाता है और अज्ञानता वश वे इसे कोई बीमारी समझ लेते हैं जबकि यह एक सामान्य प्रक्रिया है. विज्ञान के नजरिये से देखा जाय तो यदि आपके शरीर में वीर्य बनना प्रारंभ हो गया है और आप सेक्स या हस्तमैथुन नहीं करते उसके बाद यदि स्वप्न दोष नहीं होता तो यह चिंता की बात हो सकती है.
इनके अलावा कब्ज होने पर भी स्वप्न दोष हो सकता है लेकिन यह साधारण समस्या है जो किसी भी योग्य चिकित्सक द्वारा कुछ दिनों में ही ठीक किया जा सकता है.
http://www.sexkya.blogspot.in site se yah ansh yaha copy kiya hai sampurn jankari ke liye site ko vist kare.......................


सेक्स शिक्षा में अभिभावक की जिम्मेदारी


sex shiksha me abhibhavak ki zimmedari
आजकल बच्चों के लिए सेक्स शिक्षा बहुत जरूरी है। बच्चों को सेक्स शिक्षा देने में उनके अभिवावक का बहुत अहम रोल होता है। बच्चों को सेक्स की शिक्षा देने से उनके मन में इसको लेकर कोई भ्रांति नहीं रहेगी। कई बार बच्चों के मन में टीवी देखकर या अखबार पढ़कर कई तरह के प्रश्न उठते हैं। ऐसे में अभिवावक की जिम्मेदारी बनती है कि  वे बच्चे के प्रश्नों का जवाब सही व सरल ढंग से दें, जिससे उसे समझ आ जाएं। बच्चे जब अपने आस पास चीजों को देखते हैं तो उनसे संबंधित उनके मन में कई सारे सवाल होते हैं जिसे वे अपने माता-पिता से पूछते हैं।


निश्चय ही सेक्स एक ऐसा मुद्दा है, जिसके बारे में बच्चों से बात करने के पहले अभिभावक को काफी सोचना पड़ता है कि वे इसकी शुरुआत कैसे करें, क्या बताएं और क्या नहीं। लेकिन अगर अभिभावक बच्चों को इसके बारे में नहीं बताएंगे तो बच्चे कहीं और से इसकी जानकारी हासिल करने की कोशिश करेंगे जो कि खतरनाक साबित हो सकती है बच्चों के लिए।

कैसे करें चर्चा
  •  चित्रों वाली किताब के जरिए बच्चों को समझाने की कोशिश करें।
  •  समूह में चर्चा की मदद से अभिभावक बच्चों के सवालों के जवाब देकर उनकी जिज्ञासाओं को शांत कर सकते हैं।
  •  बच्चों के साथ डॉक्यूमेंट्री व शार्ट फिल्मों को देखकर उन्हें इसके बारे में बताया जा सकता है।
  •  बच्चों के सवालों का जवाब बिना किसी हिचकिचाहट के साथ देना चाहिए। अभिवावकको हमेशा याद रखना चाहिए कि उनके हिचकिचाने से बच्चे में भी हिचकिचाहट आएगी और वो कुछ भी खुलकर नहीं पूछ पाएगा।

बच्चों को सेक्स शिक्षा देने के कुछ आसान टिप्स
  • बच्चों से सेक्स पर चर्चा तभी करना चाहिए जब वह इसके लिए तैयार हो मतलब किशोरावस्था में जब वह थोड़ा सा समझने लगे।
  •  बच्चों को सिर्फ सेक्स व प्रेंगनसी के बारे में ही बताना जरूरी नहीं है, उन्हें गर्भ नियोजन के बारे में भी जरूर बताएं।
  • अगर आप खुद बच्चों से बात करने में डर रहें हो तो इस बारे में बच्चों को बताने के लिए आप किसी चिकित्सक की मदद ले सकते हैं ।  
  • हमेशा ध्यान रहे कि बच्चों की जिंदगी के निर्णय उनकी जानकारी पर निर्भर होते हैं जो आप उन्हें देते हैं। अगर यह दिमाग में रखें तो आप अपने बच्चों को बिना किसी डर व संकोच के सेक्स शिक्षा दे सकते हैं।


http://www.onlymyhealth.com/ site se yah ansh yaha copy kiya hai sampurn jankari ke liye site ko vist kare...................

स्कूलों में सेक्स शिक्षा



Schoolo me sex shiksha in hindiबहुत समय से ये बहस का मुद्दा है कि स्कूल प्रोग्राम में यौन शिक्षा को जोड़ा जाना चाहिए कि नहीं। इस मुद्दे पर कुछ समिति और संस्थाओं का कहना है कि यौन शिक्षा पश्चिमी सभ्यता और संस्कृति में ही ठीक है भारतीय समाज में नहीं। लेकिन क्या आप जानते हैं सेक्स की जानकारी टीनेजर्स को होना बहुत जरूरी है। यह जन स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत लाभकारी है। आइए जानें स्कूलों में सेक्स शिक्षा के बारे में।
  • आज के समय में स्कूलों के प्रिंसिपल्स‍ तक ये बात मानते हैं कि स्कूलों में सेक्स शिक्षा देना जरूरी है लेकिन उसके साथ ही यह भी जरूरी है कि सेक्स की जानकारी किशोरों को ट्रेंड स्टाफ से ही दिलवानी चाहिए।
  • स्कूलों में सेक्स शिक्षा के साथ ही जरूरी है कि अभिभावकों को भी इसके बारे में सही-सही जानकारी दी जाएं तभी बच्चों को सही रूप में सेक्स शिक्षा मिल पाएगी, क्योंकि बहुत से अभिभावक ऐसे हैं जो नहीं जानते कि उन्हें अपने बढ़ते बच्चों को कब किस बारे में जानकारी देनी चाहिए।
  • किशोरावस्था में शारीरिक विकास के साथ ही मानसिक विकास भी होता है, ऐसे में जरूरी है कि किशोरों को सही समय पर सही ज्ञान दिया जाए फिर वह सेक्स ज्ञान ही क्यों न हो।
  • हाल ही में हुए सर्वे में खुलासे हुए हैं कि आज के समय में सिर्फ अभिभावक ही नहीं बल्कि युवावर्ग और टीचर्स तक का मानना है कि स्कूलों में यौन शिक्षा पाठ्यक्रम आरंभ कर देना चाहिए।
  • स्कूलों में यौन शिक्षा के माध्यम से न सिर्फ भविष्य में यौन संक्रमित बीमारियों से बचा जा सकता है बल्कि असुरक्षित यौन संबंधों से भी बचा जा सकता है।
  • समाज में आ रहे बदलावों के चलते और एड्स जैसी बीमारियों के फैलने से भी सेक्स शिक्षा की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
  • यौन शिक्षा न मिलने से भी आए दिन बलात्कार, अनुचित यौन संबंध, बिनब्याहे माँ-बाप, बिखरते रिश्तों इत्यादि देखने-सुनने को मिल जाते है। ऐसे में समाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए भी सेक्स शिक्षा स्कूलों में होनी चाहिए।
  • बढ़ती उम्र में बच्चों की हर चीज को जानने की इच्छा होती है, ऐसे में उनके मन में कई सवाल भी उठते हैं। बच्चों को यदि सही समय पर उनका जवाब न दिया जाए तो बच्चा अपने सवालों के जवाब जानने के लिए गलत तरीके भी अपना सकता है। ऐसे में बच्चों को सही समय पर यौन शिक्षा देना भी जरूरी हो जाता है।
  • एकल परिवारों के चलन के कारण मां-बाप अपने बच्चे पर अधिक ध्यान नहीं दे पाते, कई बार पेरेंट्स बच्चों के आगे सेक्स संबंधी बातों का जिक्र करना अच्छा नहीं समझते ऐसे में बच्चे इंटरनेट या कुछ गलत किताबों के माध्यम से जानकारी पाते हैं जो कि बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

http://www.onlymyhealth.com/ site se yah ansh yaha copy kiya hai sampurn jankari ke liye site ko vist kare.......................

किशोरावस्था में सेक्स शिक्षा


kishorawastha me sex shikshaकिशोरों को सेक्स शिक्षा देना आजकल वक्त की जरूरत बन गया है। किशोरावस्था में ना सिर्फ हार्मोंन्स में बदलाव होता है, बल्कि शरीर में भी कई बदलाव आते हैं जिसकी वजह से किशोरों में सेक्स के प्रति रुचि बढ़ती है और वे इसके बारे में जानने का प्रयास करने लगते हैं। किशोरावस्था में सेक्स की सही शिक्षा मिलना बहुत जरूरी है। गलत सूचना व सही गाईडेन्स नहीं मिलने से यह आपके बच्चे के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

क्यों जरूरी है सेक्स शिक्षा
  • बच्चों में सेक्स की सही शिक्षा हमेशा किशोरावस्था में अनचाहे गर्भ की समस्या से बचाती है।
  • सेक्स शिक्षा से किशोरों को सुरक्षित यौन संबंध की जानकारी मिलती है जैसे कंडोम का प्रयोग।  
  • सेक्स शिक्षा से किशोरावस्था में अनचाहे गर्भ से बचाव के साथ इससे होने वाले खतरों से भी सुरक्षा होती है।  
  • सेक्स शिक्षा के जरिए बच्चों में सेक्स की समझ विकसित होती है। जब वे इस दौर से गुजरते हैं तो यही बातें उनके काम आती हैं।  
  • किशोरावस्था में सेक्स शिक्षा देने से बच्चों में इसके प्रति उत्सुकता कम हो जाती है जिससे उनमें सेक्स के प्रति देर से सक्रिय होने की संभावना बढ़ जाती है।

कैसे दें सेक्स शिक्षा

किशोरावस्था में बच्चों में सेक्स के प्रति कई सवाल होते हैं। टी.वी, इंटरनेट के जरिए उनके ये सवाल और बढ़ जाते हैं। किशोरावस्था में बच्चों में कई बदलाव होते हैं, ऐसे में जरूरी है कि उन्हें सेक्स शिक्षा अपने स्कूल व अभिभावक से मिलें। अगर आप बच्चों के सवालों के जवाब को टालने की कोशिश करेंगे तो वह इसकी जानकारी कहीं और से लेने की कोशिश करेंगे और हो सकता है कि उन्हेंब गलत व अधूरी जानकारी मिलें जो उसके लिए नुकसानदेह हो।
  •  किशोरावस्था में सेक्स शिक्षा देते समय बच्चों को एड्स व अन्य यौन रोगों के बारे में जरूर बताएं। साथ ही उन्हें इससे बचाव के तरीकों के बारे में भी बताएं।
  • प्रत्येक टीचर व माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को सही जानकारी दें। और जो भी उनके पास गलत जानकारी हो उसे सुधारें।
  •  बच्चों को इस उम्र में सेक्स की सही शिक्षा देने से वे अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरुक रहते हैं। इस उम्र में बच्चों को यह समझाने की जरूरत होती है कि सेक्स से पहले सावधानी बहुत जरूरी है।  
हमारे देश में कई लड़कियां शादी से पहले गर्भवती हो जाती है इसकी सबसे बड़ी वजह सेक्स की सही शिक्षा नहीं मिलना। सेक्स समस्याओं से बचने के लिए जरूरी है इसकी पर्याप्त जानकारी होना, जो सिर्फ सेक्स शिक्षा के जरिए ही दी जा सकती है।

http://www.onlymyhealth.com/ site se yah ansh yaha copy kiya hai sampurn jankari ke liye site ko vist kare.......................




भारत में सेक्स शिक्षा



bharat me sex shiksha in hindiभारत में स्कूली शिक्षा के साथ ही सेक्स शिक्षा को भी पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए कदम उठाएं गए, लेकिन आज भी देश के लोगों को सेक्स शिक्षा को अपनाना रास नहीं आया। इसलिए लोगों ने यौन शिक्षा का अच्छा खासा विरोध जताया। किसी भी परिवार या आसपास के लोगों से इस बाबत बातचीत की गई तो किसी ने इसे अच्छा बताया तो किसी ने गलत। आइए जानें भारत में सेक्स शिक्षा के बारे में।
  • बदलते भारत के साथ ही कई क्षेत्रों में भी परिवर्तन हुए है, इन्हीं परिवर्तनों के चलते कुछ परिवर्तन सही दिशा में हुए तो कुछ गलत दिशा में। इन्हीं परिवर्तनों के चलते सरकार ने हाल ही के दिनों में शिक्षा में भी अमूल-चूल परिर्वतन करने की कोशिश की।
  • इन परिवर्तनों के तहत सरकार स्कू्ली बच्चों की शिक्षा में छठीं क्लास से सेक्स शिक्षा को भी शामिल करना चाहती है, लेकिन भारत में सेक्स शिक्षा को लेकर खूब बवाल मचाया गया।
  • लोगों का मानना है कि स्कूलों में सेक्स शिक्षा होने से भारतीय सभ्यता और संस्कृति पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
  • क्या आप जानते हैं आज के समय में सेक्स शिक्षा का बहुत महत्व है। यदि स्कूलों में सेक्स शिक्षा शुरू कर दी जाए तो इसका किशोरों को पथभ्रष्ट‍ होने से रोका जा सकता है, लेकिन इसके लिए जरूरी है बच्चों को सही रूप में पूर्ण सेक्स शिक्षा दी जाए।
  • स्कूलों में यौन शिक्षा के माध्यम से न सिर्फ भविष्य में यौन संक्रमित बीमारियों से बचा जा सकता है बल्कि असुरक्षित यौन संबंधों से भी बचा जा सकता है।
  • बच्चों को सही उम्र में सेक्स शिक्षा देने से उनके शारीरिक विकास के साथ ही मानसिक विकास भी पूरी तरह से होता है।
  • आंकड़ों पर गौर करें तो वर्तमान में 27 से 30 फीसदी होने वाले एबॉर्शन किशोरी लड़कियां करवाती हैं, यदि उन्हें सही रूप में यौन शिक्षा दी जाएगी तो वे गर्भपात के जंजाल से आसानी से बच सकती हैं यानी बिन ब्याहें मां बनने से बच सकती हैं।
  • बढ़ती उम्र में बच्चे नई-नई चीजों को जानने के इच्छुक रहते हैं और आज के टैक्नोलॉजी वर्ल्ड़ में कुछ भी जानना नामुमकिन नहीं। यदि बच्चों को सही समय पर सही रूप में यौन शिक्षा नहीं दी जाएगी तो अपने प्रश्नों का हल ढूंढ़ने के लिए वे इधर-उधर के रास्ते
  • अख्तियार करेंगे जो कि बच्चों के मानसिक विकास में बाधा डाल सकते हैं।
  • भारत में सेक्स शिक्षा लागू होने के साथ-साथ अभिभावकों को भी इस ओर जागरूक होना होगा और अपने बच्चों को सही उम्र में यौन शिक्षा से सरोकार कराना होगा, तभी सेक्स शिक्षा का सकारात्मक प्रभाव दिखाई पड़ेंगे।
  • आज आप अपने परिवार या आसपास के लोगों को देखेंगे तो आप पाएंगे कि वे मैच्योर होने के बावजूद सेक्स के बारे में बात करने से कतराते हैं। इसका एकमात्र कारण यही है कि आज भी लोग सेक्स जैसे मुद्दे पर बात करने से कतराते हैं और उन्हें सेक्स के बारे में पूर्ण जानकारी भी नहीं है, ऐसा सिर्फ इसलिए है क्योंकि अब तक भारत में सेक्स शिक्षा को स्कूलों में लागू करने के बारे में सोचा भी नहीं गया था।
http://www.onlymyhealth.com/ site se yah ansh yaha copy kiya hai sampurn jankari ke liye site ko vist kare.......................

लड़कियों के लिए सेक्स शिक्षा


किशोरावस्था में लड़कियों को सेक्स शिक्षा देना बहुत जरुरी हो जाता है, क्योंकि इस समय लड़कियों के कई लड़के दोस्त होते हैं जिनके साथ वे स्कूल, ट्यूशन में ज्यादा समय बिताती हैं। ऐसे में अक्सर वे दोनों एक दूसरे की तरफ आकर्षित होने लगते हैं इसलिए उन्हें सेक्स शिक्षा देना बहुत ही जरूरी है। क्योंकि इसके बिना उनसे कई तरह की गलतियां हो सकती है। लड़कियों को  सेक्स शिक्षा देने में उनकी माताओं का अहम रोल होता है। अक्सर लड़कियां इस उम्र में अपनी मां से हर बात शेयर करती है जिससे मां को सेक्स शिक्षा देने का मौका मिल जाता है।

एक लड़की का शरीर किशोरावस्था में विकसित होना शुरु हो जाता है, लेकिन वह अपने अंदर होने वाले जैविक व भावनात्मक बदलावों को समझ नहीं पाती हैं। और वो इसका जिक्र अपनी सहेलियों से करती हैं लेकिन वे भी इसी दौर से गुजरती हैं इसलिए उनके द्वारा बताई गई बातें उसके समस्याओं को हल नहीं कर पाती हैं। इस उम्र में लड़कियों को सही गाइडलाइन की जरूरत होती है। जो उन्हें उनके स्कूल व अभिभावक से मिल सकती है। 

लड़कियों को सेक्स शिक्षा देने में उन्हें सबसे पहले मासिक धर्म के बारे में बताना चाहिए। कई बार माता-पिता के लिए यह काफी मुश्किल भरा होता है लेकिन यह जरूरी है कि लड़कियों को इसकी शिक्षा समय पर दी जाए। लड़कियों को सीधे व सरल ढ़ंग से सेक्स की शिक्षा दी जानी चाहिए। कठिन व भारी शब्दों के प्रयोग से वह समझ नहीं पाएगी कि आप उसे क्या समझाना चाहते हैं।  आईए जाने कैसे दें लड़कियों को सेक्स शिक्षा।  

सही सूचना दें

लड़कियों को सेक्स की शिक्षा देते समय डरे नहीं उन्हें उनकी समझ के अनुसार समझाने की कोशिश करें। बच्चों को सही बातें बताएं क्योंकि गलत बातों से उनका तो नुकसान होगा ही साथ ही उनके साथियों का भी जिनसे वे ये बातें शेयर करेंगी।

मासिक धर्म के बारे में बताएं

लड़कियों को मासिक धर्म के बारे में पूरी जानकारी दें। यह क्या है, क्यों होता है, कब होता है आदि। आपके द्वारा बताई गई बातों से उन्हें इस दौरान होने वाली समस्याओं में मदद मिलती है। लड़कियां जब पहली बार इस समस्या से गुजरती हैं तो वे काफी परेशान हो जाती है ऐसे में उन्हें आपके प्यार व सहयोग की जरूरत होती है।

भावनात्मक बदलाव

लड़कियों में किशोरावस्था के शारीरिक बदलाव के साथ भावनात्मक बदलाव भी होते हैं। यह बहुत ही सामान्य प्रक्रिया है क्योंकि शरीर में नए हार्मोन्स बनते हैं जिसका असर लड़कियों के मूड व स्वभाव पर होता है। ऐसे में अभिभावक को उनसे संभावित समस्याओं के बारे में बात करनी चाहिए जिसके कारण उनका मूड बदलता रहता है।

http://www.onlymyhealth.com/ site se yah ansh yaha copy kiya hai sampurn jankari ke liye site ko vist kare.......................


शादीशुदा लोगों के लिए सेक्स शिक्षा


शादीशुदा लोगों को सेक्स शिक्षा की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इसके अभाव में कई बार उनसे गलतियां हो जाती हैं। जिसमें से प्रमुख हैं अनचाहा गर्भ व यौन रोग। सेक्स की सही शिक्षा नहीं मिलने से शादीशुदा लोगों में सुरक्षित यौन संबंधों के बारे में जानकारी नहीं होती है जिसकी वजह से वे यौन रोगों का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में सेक्स शिक्षा ही इसका सबसे बड़ा बचाव है। विश्व के सभी सेक्स विशेषज्ञों का मानना है कि लड़के-लड़कियों को युवावस्था से पहले ही सेक्स से संबंधित शिक्षा दी जानी चाहिए। युवावस्था के समय यदि लड़के-लड़कियों को सेक्स के बारे में सही जानकारी दी जाए तो उन्हें विवाहित जीवन में किसी प्रकार की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा और अपने अधूरे ज्ञान के कारण विवाहित जीवन को बर्बाद करने से भी बच जाएगा।

क्यों जरूरी है सेक्स शिक्षा  

भारत में विवाह के लिए लड़की की उम्र 18 वर्ष मानी गई है। जब लड़की 18 वर्ष की हो जाती है तो उसे विवाह के योग्य समझकर उसकी शादी कर दी जाती है। लेकिन सेक्स शिक्षा के अभाव में उसे कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्या से लड़ना पड़ता है। पिछड़े इलाकों में सेक्स शब्द का नाम लेना गलत समझा जाता है, जिसकी वजह से लड़कियों को सेक्स की सही शिक्षा नहीं मिल पाती है। लेकिन जैसे-जैसे लड़कियां शिक्षित होने लगी है वैसे-वैसे लड़कियों में सेक्स को लेकर फैली अज्ञानता दूर होने लगी है। आज 50-55 प्रतिशत लड़कियां यह मानने लगी हैं कि महिलाओं के लिए विवाहित जीवन में सेक्स शिक्षा का होना बेहद आवश्यक है। यहां तक कि स्त्री-पुरुष दोनों ही इस बात को मानने लगे हैं कि विवाहित जीवन को सफल और सुखमय बनाने के लिए सेक्स शिक्षा कितना आवश्यक है।

सेक्स शिक्षा के फायदें

  • शादीशुदा लोगों को सेक्स शिक्षा देने से उन्हें अनचाहे गर्भ की समस्या से बचाया जा सकता है। जिसकी वजह से एबार्शन के मामले बढ़ते जा रहे हैं।
  • सेक्स शिक्षा से एचाईवी एड्स जैसे यौन रोगों से बचाव होता है। उन्हें कांडम के इस्तेमाल के बारे में बताना चाहिए जिसकी वजह से वे सुरक्षित यौन संबंध के लिए प्रेरित होते हैं जिससे यौन रोगों से उनकी रक्षा होती है।
  • शादीशुदा लोगों को सेक्स शिक्षा देने से जनसंख्या वृद्धि रोकी जा सकती है। साथ ही उनको यह भी बताना चाहिए कि बच्चे को अच्छी परवरिश देने के लिए दो से ज्यादा बच्चे नहीं होने चाहिए।
  • सेक्स शिक्षा के अभाव के चलते लोगों में गलत धारणाएं पैदा होने लगती हैं। गलत जानकारी होने के कारण उनमें भ्रम और गलतफमियां पैदा हो जाती हैं जो जीवन में आगे चलकर परेशानी का कारण बन जाता है।
http://www.onlymyhealth.com/ site se yah ansh yaha copy kiya hai sampurn jankari ke liye site ko vist kare.......................

बच्चों को सेक्स के बारे में कैसे बतायें

अभिवावकों का बच्चों के हर प्रश्न का जवाब देना बहुत मुश्किल हो जाता है खासकर जब बच्चों के सवाल सेक्स के बारे में हो। बच्चों से सेक्स के बारे में चर्चा करना उनके लिए बहुत बड़ी चुनौती होती है। ऐसी स्थिति में अभिभावकों द्वारा बच्चों की जिज्ञासाओं का जवाब देना, उनके स्वस्थ व्यवहार और विकास में सहायक होता है। ऐसे अभिभावक जो अपने बच्चों की जिज्ञासाओं पर चर्चा नहीं करना चाहते हैं वे अपने बच्चे को एक तरह से नुकसान पहुंचाते हैं या यह कह सकते हैं कि वे उसे गलत रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। ऐसे में बच्चे के मन में गलत धारणा बनती है जो आगे जाकर उसकी जिन्दगी में गलत प्रभाव डाल सकती है। कई बार बच्चे अभिभावकों से जानकारी न मिलने पर वह कहीं और से जानकारी लेने का प्रयास करते हैं और इन परिस्थितियों में उसे जो जानकारी मिलती है वो या तो अधूरी होती है या फिर गलत होती है।

छोटे बच्चे से सेक्स चर्चा
बच्चों से सेक्स पर चर्चा उतनी ही करें जितनी उन्हें समझ आए। अभिभावकों को इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि बच्चा इन चीजों को कितना समझ सकता है। बच्चों को साधरण भाषा में बताएं और ध्यान रहे कि सेक्स चर्चा करें न कि संभोग या सहवास पर। अगर बच्चा बड़ा है तो शारीरिक रचना और विकसित हो रहे अंगों आदि पर चर्चा की जा सकती है। बच्चा सेक्स की शुरूआत को लेकर कम उम्र में काफी जिज्ञासु रहता है। देखने में आया है जो बच्चे अपने माता-पिता से इन विषयों में चर्चा करते हैं वे काफी सहज रहते हैं साथ ही वे अपनी अन्य समस्याओं के समाधान के लिए भी माता पिता के काफी निकट आ जाते हैं। जो बाद में उनके मार्गदर्शन में सहायक होता है।
कैसे करें शुरुआत
  • कई बार अभिभावक बच्चों से सेक्स पर चर्चा के लिए तो तैयार हो जाते हैं लेकिन उन्हें समझ नहीं आता कि वे शुरुआत कैसे करें। ऐसे में वे रोजमर्रा की घटना, अवसर आदि को लेकर सेक्स पर चर्चा कर सकते हैं।
  • कई बार बच्चा किसी गर्भवती महिला को देखता है और उसके बढ़े हुए पेट के बारे में जानकारी चाहता है तो अभिभावक इस अवसर को प्रसव की चर्चा शुरू करने का उचित अवसर के रुप में प्रयोग कर सकते हैं।
  • बच्चा जब यौवनावस्था की तरफ बढ़ता है तो उसके शरीर व हार्मोन्स में कई तरह के बदलाव होते हैं। ऐसे में अभिवावकों को इसके बारे में बताना चाहिए।
प्रश्नों का जवाब सीधे और ईमानदारी से दे
सेक्स को लेकर बच्चा जब कोई जानकारी चाहता है तो सीधे, सरल और ईमानदारी से जवाब देना चाहिये क्योंकि अगर उसे कोई संदेह हो गया तो वह सेक्स के बारे में गलत भ्रांति बना सकता है। साथ ही उसके द्वारा पूछे गए सवाल को नजरअंदाज न करें न ही उसकी जिज्ञासाओं पर उसे डांटे इससे बालमन में सेक्स को लेकर गलत धारणा बन जाएगी जिसका आगे जाकर वह गलत प्रयोग कर सकता है।
http://www.onlymyhealth.com/ site se yah ansh yaha copy kiya hai sampurn jankari ke liye site ko vist kare.......................