MR-SPECIAL
Sunday, 21 October 2012
रजोधर्म/माहवारी क्या है?
10 से 15 साल की आयु की लड़की के अण्डकोष हर महीने एक विकसित अण्डा उत्पन्न करना शुरू कर देते हैं। वह अण्डा अण्डवाही नली (फालैपियन ट्यूव) के द्वारा नीचे जाता है जो कि अण्डकोष को गर्भाषय से जोड़ती है। जब अण्डा गर्भाषय में पहुंचता है, उसका अस्तर रक्त और तरल पदार्थ से गाढ़ा हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है कि यदि अण्डा उर्वरित हो जाए, तो वह बढ़ सके और शिशु के जन्म के लिए उसके स्तर में विकसित हो सके। यदि उस अण्डे का पुरूष के वीर्य से सम्मिलन न हो तो वह स्राव बन जाता है जो कि योनि से निष्कासित हो जाता है।माहवारी चक्र की सामान्य अवधि क्या है?
माहवारी चक्र महीने में एक बार होता है, सामान्यतः 28 से 32 दिनों में एक बार।
मासिक धर्म/माहवारी की सामान्य कालावधि क्या है?
हालांकि अधिकतर मासिक धर्म का समय तीन से पांच दिन रहता है परन्तु दो से सात दिन तक की अवधि को सामान्य माना जाता है।
माहवारी मे सफाई कैसै बनाए रखें?
एक बार माहवारी शुरू हो जाने पर, आपको सैनेटरी नैपकीन या रक्त स्राव को सोखने के लिए किसी पैड का उपयोग करना होगा। रूई की परतों से पैड बनाए जाते हैं कुछ में दोनों ओर अलग से (Wings) तने लगे रहते हैं जो कि आपके जांघिये के किनारों पर मुड़कर पैड को उसकी जगह पर बनाए रखते हैं और स्राव को बह जाने से रोकते हैं।
सैनेटरी पैड किस प्रकार के होते हैं?
भारी हल्की माहवारी के लिए अनेक अलग-अलग मोटाई के पैड होते हैं, रात और दिन के लिए भी अलग- अलग होते हैं। कुछ में दुर्गन्ध नाषक या निर्गन्धीकरण के लिए पदार्थ डाले जाते हैं। सभी में नीचे एक चिपकाने वाली पट्टी लगी रहती है जिससे वह आपके जांघिए से चिपका रहता है।
पैड का उपयोग कैसे करना चाहिए?
पैड का उपयोग बड़ा सरल है, गोंद को ढकने वाली पट्टी को उतारें, पैड को अपने जांघिए में दोनों जंघाओँ के बीच दबाएं (यदि पैड में विंग्स लगे हैं तो उन्हें पैड पर जंघाओं के नीचे चिपका दें)
पैड को कितनी जल्दी बदलना चाहिए?
श्रेष्ठ तो यही है कि हर तीन या चार घंटे में पैड बदल लें, भले ही रक्त स्राव अधिक न भी हो, क्योंकि नियमित बदलाव से कीटाणु नहीं पनपते और दुर्गन्ध नही बनती। स्वाभाविक है, कि यदि स्राव भारी है, तो आप को और जल्दी बदलना पड़ेगा, नहीं तो वे जल्दी ही बिखर जाएगा।
पैड को कैसे फेंकना चाहिए?
पैड को निकालने के बाद, उसे एक पॉलिथिन में कसकर लपेट दें और फिर उसे कूड़े के डिब्बे में डालें। उसे अपने टॉयलेट मे मत डालें - वे बड़े होते है, सीवर की नली को बन्द कर सकते हैं
स्वप्न दोष (Night fall) कोई बीमारी नहीं है
मुझे कई सवालों भरे मेल आए जिसमें से 60 फीसदी सवालों में स्वप्न दोष बंद करने की जानकारी मांगी गई थी या फिर उसका कोई इलाज पूछा गया था कुछ ने तो यहां तक बताया कि जिस डॉक्टर से वे इलाज करा रहा है उसकी दवा काफी महंगी है कुछ उपाय बताएं कि स्वप्न दोष न हो... आदि-आदि... इससे यह पता चलता है कि आज की युवा व किशोर पीढ़ी किस हद तक अज्ञानता की शिकार है. ये स्वप्न दोष जैसी सामान्य शारीरिक क्रिया को बीमारी मान लेते हैं और नीम हकीम इसी का नाजायज फायदा उठा कर युवाओं को ठगते हैं. यहां हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि स्वप्न दोष कोई बीमारी नहीं है बल्कि यह एक सामान्य शारीरिक क्रिया है. चूंकि शरीर में वीर्य का सतत् निर्माण होता रहता है और शरीर से यह वीर्य बाहर सिर्फ तीन तरीकों से आता है-
1. सेक्स द्वारा
2. हस्तमैथुन द्वारा
3. स्वप्न दोष द्वारा
अब यदि सेक्स व हस्तमैथुन द्वारा वीर्य शरीर से बाहर नहीं आता है तो सामान्यतौर पर यह स्वप्न दोष के तरीके से शरीर से बाहर आता है. इसलिये जो लोग सेक्स या हस्तमैथुन नहीं करते हैं या काफी अंतराल में करते हैं उन्हे स्वप्न दोष की शिकायत हो सकती है. लेकिन यह सामान्य प्रक्रिया है. दरअसल जब किशोर में वीर्य बनने की प्रक्रिया प्रारंभ होती है तो उससे बाह्य तौर पर जानकारी तो नहीं मिलती साथ ही जब उसका शुक्राशय वीर्य से भर जाता है तो वह वीर्य बाहर आ जाता है और अज्ञानता वश वे इसे कोई बीमारी समझ लेते हैं जबकि यह एक सामान्य प्रक्रिया है. विज्ञान के नजरिये से देखा जाय तो यदि आपके शरीर में वीर्य बनना प्रारंभ हो गया है और आप सेक्स या हस्तमैथुन नहीं करते उसके बाद यदि स्वप्न दोष नहीं होता तो यह चिंता की बात हो सकती है.
इनके अलावा कब्ज होने पर भी स्वप्न दोष हो सकता है लेकिन यह साधारण समस्या है जो किसी भी योग्य चिकित्सक द्वारा कुछ दिनों में ही ठीक किया जा सकता है.
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1. सेक्स द्वारा2. हस्तमैथुन द्वारा
3. स्वप्न दोष द्वारा
अब यदि सेक्स व हस्तमैथुन द्वारा वीर्य शरीर से बाहर नहीं आता है तो सामान्यतौर पर यह स्वप्न दोष के तरीके से शरीर से बाहर आता है. इसलिये जो लोग सेक्स या हस्तमैथुन नहीं करते हैं या काफी अंतराल में करते हैं उन्हे स्वप्न दोष की शिकायत हो सकती है. लेकिन यह सामान्य प्रक्रिया है. दरअसल जब किशोर में वीर्य बनने की प्रक्रिया प्रारंभ होती है तो उससे बाह्य तौर पर जानकारी तो नहीं मिलती साथ ही जब उसका शुक्राशय वीर्य से भर जाता है तो वह वीर्य बाहर आ जाता है और अज्ञानता वश वे इसे कोई बीमारी समझ लेते हैं जबकि यह एक सामान्य प्रक्रिया है. विज्ञान के नजरिये से देखा जाय तो यदि आपके शरीर में वीर्य बनना प्रारंभ हो गया है और आप सेक्स या हस्तमैथुन नहीं करते उसके बाद यदि स्वप्न दोष नहीं होता तो यह चिंता की बात हो सकती है.
इनके अलावा कब्ज होने पर भी स्वप्न दोष हो सकता है लेकिन यह साधारण समस्या है जो किसी भी योग्य चिकित्सक द्वारा कुछ दिनों में ही ठीक किया जा सकता है.
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सेक्स शिक्षा में अभिभावक की जिम्मेदारी

आजकल बच्चों के लिए सेक्स शिक्षा बहुत जरूरी है। बच्चों को सेक्स शिक्षा देने में उनके अभिवावक का बहुत अहम रोल होता है। बच्चों को सेक्स की शिक्षा देने से उनके मन में इसको लेकर कोई भ्रांति नहीं रहेगी। कई बार बच्चों के मन में टीवी देखकर या अखबार पढ़कर कई तरह के प्रश्न उठते हैं। ऐसे में अभिवावक की जिम्मेदारी बनती है कि वे बच्चे के प्रश्नों का जवाब सही व सरल ढंग से दें, जिससे उसे समझ आ जाएं। बच्चे जब अपने आस पास चीजों को देखते हैं तो उनसे संबंधित उनके मन में कई सारे सवाल होते हैं जिसे वे अपने माता-पिता से पूछते हैं।
सेक्स शिक्षा जरुरी
निश्चय ही सेक्स एक ऐसा मुद्दा है, जिसके बारे में बच्चों से बात करने के पहले अभिभावक को काफी सोचना पड़ता है कि वे इसकी शुरुआत कैसे करें, क्या बताएं और क्या नहीं। लेकिन अगर अभिभावक बच्चों को इसके बारे में नहीं बताएंगे तो बच्चे कहीं और से इसकी जानकारी हासिल करने की कोशिश करेंगे जो कि खतरनाक साबित हो सकती है बच्चों के लिए।
कैसे करें चर्चा
- चित्रों वाली किताब के जरिए बच्चों को समझाने की कोशिश करें।
- समूह में चर्चा की मदद से अभिभावक बच्चों के सवालों के जवाब देकर उनकी जिज्ञासाओं को शांत कर सकते हैं।
- बच्चों के साथ डॉक्यूमेंट्री व शार्ट फिल्मों को देखकर उन्हें इसके बारे में बताया जा सकता है।
- बच्चों के सवालों का जवाब बिना किसी हिचकिचाहट के साथ देना चाहिए। अभिवावकको हमेशा याद रखना चाहिए कि उनके हिचकिचाने से बच्चे में भी हिचकिचाहट आएगी और वो कुछ भी खुलकर नहीं पूछ पाएगा।
बच्चों को सेक्स शिक्षा देने के कुछ आसान टिप्स
- बच्चों से सेक्स पर चर्चा तभी करना चाहिए जब वह इसके लिए तैयार हो मतलब किशोरावस्था में जब वह थोड़ा सा समझने लगे।
- बच्चों को सिर्फ सेक्स व प्रेंगनसी के बारे में ही बताना जरूरी नहीं है, उन्हें गर्भ नियोजन के बारे में भी जरूर बताएं।
- अगर आप खुद बच्चों से बात करने में डर रहें हो तो इस बारे में बच्चों को बताने के लिए आप किसी चिकित्सक की मदद ले सकते हैं ।
- हमेशा ध्यान रहे कि बच्चों की जिंदगी के निर्णय उनकी जानकारी पर निर्भर होते हैं जो आप उन्हें देते हैं। अगर यह दिमाग में रखें तो आप अपने बच्चों को बिना किसी डर व संकोच के सेक्स शिक्षा दे सकते हैं।
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स्कूलों में सेक्स शिक्षा
बहुत समय से ये बहस का मुद्दा है कि स्कूल प्रोग्राम में यौन शिक्षा को जोड़ा जाना चाहिए कि नहीं। इस मुद्दे पर कुछ समिति और संस्थाओं का कहना है कि यौन शिक्षा पश्चिमी सभ्यता और संस्कृति में ही ठीक है भारतीय समाज में नहीं। लेकिन क्या आप जानते हैं सेक्स की जानकारी टीनेजर्स को होना बहुत जरूरी है। यह जन स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। आइए जानें स्कूलों में सेक्स शिक्षा के बारे में।- आज के समय में स्कूलों के प्रिंसिपल्स तक ये बात मानते हैं कि स्कूलों में सेक्स शिक्षा देना जरूरी है लेकिन उसके साथ ही यह भी जरूरी है कि सेक्स की जानकारी किशोरों को ट्रेंड स्टाफ से ही दिलवानी चाहिए।
- स्कूलों में सेक्स शिक्षा के साथ ही जरूरी है कि अभिभावकों को भी इसके बारे में सही-सही जानकारी दी जाएं तभी बच्चों को सही रूप में सेक्स शिक्षा मिल पाएगी, क्योंकि बहुत से अभिभावक ऐसे हैं जो नहीं जानते कि उन्हें अपने बढ़ते बच्चों को कब किस बारे में जानकारी देनी चाहिए।
- किशोरावस्था में शारीरिक विकास के साथ ही मानसिक विकास भी होता है, ऐसे में जरूरी है कि किशोरों को सही समय पर सही ज्ञान दिया जाए फिर वह सेक्स ज्ञान ही क्यों न हो।
- हाल ही में हुए सर्वे में खुलासे हुए हैं कि आज के समय में सिर्फ अभिभावक ही नहीं बल्कि युवावर्ग और टीचर्स तक का मानना है कि स्कूलों में यौन शिक्षा पाठ्यक्रम आरंभ कर देना चाहिए।
- स्कूलों में यौन शिक्षा के माध्यम से न सिर्फ भविष्य में यौन संक्रमित बीमारियों से बचा जा सकता है बल्कि असुरक्षित यौन संबंधों से भी बचा जा सकता है।
- समाज में आ रहे बदलावों के चलते और एड्स जैसी बीमारियों के फैलने से भी सेक्स शिक्षा की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
- यौन शिक्षा न मिलने से भी आए दिन बलात्कार, अनुचित यौन संबंध, बिनब्याहे माँ-बाप, बिखरते रिश्तों इत्यादि देखने-सुनने को मिल जाते है। ऐसे में समाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए भी सेक्स शिक्षा स्कूलों में होनी चाहिए।
- बढ़ती उम्र में बच्चों की हर चीज को जानने की इच्छा होती है, ऐसे में उनके मन में कई सवाल भी उठते हैं। बच्चों को यदि सही समय पर उनका जवाब न दिया जाए तो बच्चा अपने सवालों के जवाब जानने के लिए गलत तरीके भी अपना सकता है। ऐसे में बच्चों को सही समय पर यौन शिक्षा देना भी जरूरी हो जाता है।
- एकल परिवारों के चलन के कारण मां-बाप अपने बच्चे पर अधिक ध्यान नहीं दे पाते, कई बार पेरेंट्स बच्चों के आगे सेक्स संबंधी बातों का जिक्र करना अच्छा नहीं समझते ऐसे में बच्चे इंटरनेट या कुछ गलत किताबों के माध्यम से जानकारी पाते हैं जो कि बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
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किशोरावस्था में सेक्स शिक्षा
किशोरों को सेक्स शिक्षा देना आजकल वक्त की जरूरत बन गया है। किशोरावस्था में ना सिर्फ हार्मोंन्स में बदलाव होता है, बल्कि शरीर में भी कई बदलाव आते हैं जिसकी वजह से किशोरों में सेक्स के प्रति रुचि बढ़ती है और वे इसके बारे में जानने का प्रयास करने लगते हैं। किशोरावस्था में सेक्स की सही शिक्षा मिलना बहुत जरूरी है। गलत सूचना व सही गाईडेन्स नहीं मिलने से यह आपके बच्चे के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
क्यों जरूरी है सेक्स शिक्षा
- बच्चों में सेक्स की सही शिक्षा हमेशा किशोरावस्था में अनचाहे गर्भ की समस्या से बचाती है।
- सेक्स शिक्षा से किशोरों को सुरक्षित यौन संबंध की जानकारी मिलती है जैसे कंडोम का प्रयोग।
- सेक्स शिक्षा से किशोरावस्था में अनचाहे गर्भ से बचाव के साथ इससे होने वाले खतरों से भी सुरक्षा होती है।
- सेक्स शिक्षा के जरिए बच्चों में सेक्स की समझ विकसित होती है। जब वे इस दौर से गुजरते हैं तो यही बातें उनके काम आती हैं।
- किशोरावस्था में सेक्स शिक्षा देने से बच्चों में इसके प्रति उत्सुकता कम हो जाती है जिससे उनमें सेक्स के प्रति देर से सक्रिय होने की संभावना बढ़ जाती है।
कैसे दें सेक्स शिक्षा
किशोरावस्था में बच्चों में सेक्स के प्रति कई सवाल होते हैं। टी.वी, इंटरनेट के जरिए उनके ये सवाल और बढ़ जाते हैं। किशोरावस्था में बच्चों में कई बदलाव होते हैं, ऐसे में जरूरी है कि उन्हें सेक्स शिक्षा अपने स्कूल व अभिभावक से मिलें। अगर आप बच्चों के सवालों के जवाब को टालने की कोशिश करेंगे तो वह इसकी जानकारी कहीं और से लेने की कोशिश करेंगे और हो सकता है कि उन्हेंब गलत व अधूरी जानकारी मिलें जो उसके लिए नुकसानदेह हो।
- किशोरावस्था में सेक्स शिक्षा देते समय बच्चों को एड्स व अन्य यौन रोगों के बारे में जरूर बताएं। साथ ही उन्हें इससे बचाव के तरीकों के बारे में भी बताएं।
- प्रत्येक टीचर व माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को सही जानकारी दें। और जो भी उनके पास गलत जानकारी हो उसे सुधारें।
- बच्चों को इस उम्र में सेक्स की सही शिक्षा देने से वे अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरुक रहते हैं। इस उम्र में बच्चों को यह समझाने की जरूरत होती है कि सेक्स से पहले सावधानी बहुत जरूरी है।
हमारे देश में कई लड़कियां शादी से पहले गर्भवती हो जाती है इसकी सबसे बड़ी वजह सेक्स की सही शिक्षा नहीं मिलना। सेक्स समस्याओं से बचने के लिए जरूरी है इसकी पर्याप्त जानकारी होना, जो सिर्फ सेक्स शिक्षा के जरिए ही दी जा सकती है।
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भारत में सेक्स शिक्षा
भारत में स्कूली शिक्षा के साथ ही सेक्स शिक्षा को भी पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए कदम उठाएं गए, लेकिन आज भी देश के लोगों को सेक्स शिक्षा को अपनाना रास नहीं आया। इसलिए लोगों ने यौन शिक्षा का अच्छा खासा विरोध जताया। किसी भी परिवार या आसपास के लोगों से इस बाबत बातचीत की गई तो किसी ने इसे अच्छा बताया तो किसी ने गलत। आइए जानें भारत में सेक्स शिक्षा के बारे में।- बदलते भारत के साथ ही कई क्षेत्रों में भी परिवर्तन हुए है, इन्हीं परिवर्तनों के चलते कुछ परिवर्तन सही दिशा में हुए तो कुछ गलत दिशा में। इन्हीं परिवर्तनों के चलते सरकार ने हाल ही के दिनों में शिक्षा में भी अमूल-चूल परिर्वतन करने की कोशिश की।
- इन परिवर्तनों के तहत सरकार स्कू्ली बच्चों की शिक्षा में छठीं क्लास से सेक्स शिक्षा को भी शामिल करना चाहती है, लेकिन भारत में सेक्स शिक्षा को लेकर खूब बवाल मचाया गया।
- लोगों का मानना है कि स्कूलों में सेक्स शिक्षा होने से भारतीय सभ्यता और संस्कृति पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
- क्या आप जानते हैं आज के समय में सेक्स शिक्षा का बहुत महत्व है। यदि स्कूलों में सेक्स शिक्षा शुरू कर दी जाए तो इसका किशोरों को पथभ्रष्ट होने से रोका जा सकता है, लेकिन इसके लिए जरूरी है बच्चों को सही रूप में पूर्ण सेक्स शिक्षा दी जाए।
- स्कूलों में यौन शिक्षा के माध्यम से न सिर्फ भविष्य में यौन संक्रमित बीमारियों से बचा जा सकता है बल्कि असुरक्षित यौन संबंधों से भी बचा जा सकता है।
- बच्चों को सही उम्र में सेक्स शिक्षा देने से उनके शारीरिक विकास के साथ ही मानसिक विकास भी पूरी तरह से होता है।
- आंकड़ों पर गौर करें तो वर्तमान में 27 से 30 फीसदी होने वाले एबॉर्शन किशोरी लड़कियां करवाती हैं, यदि उन्हें सही रूप में यौन शिक्षा दी जाएगी तो वे गर्भपात के जंजाल से आसानी से बच सकती हैं यानी बिन ब्याहें मां बनने से बच सकती हैं।
- बढ़ती उम्र में बच्चे नई-नई चीजों को जानने के इच्छुक रहते हैं और आज के टैक्नोलॉजी वर्ल्ड़ में कुछ भी जानना नामुमकिन नहीं। यदि बच्चों को सही समय पर सही रूप में यौन शिक्षा नहीं दी जाएगी तो अपने प्रश्नों का हल ढूंढ़ने के लिए वे इधर-उधर के रास्ते
- अख्तियार करेंगे जो कि बच्चों के मानसिक विकास में बाधा डाल सकते हैं।
- भारत में सेक्स शिक्षा लागू होने के साथ-साथ अभिभावकों को भी इस ओर जागरूक होना होगा और अपने बच्चों को सही उम्र में यौन शिक्षा से सरोकार कराना होगा, तभी सेक्स शिक्षा का सकारात्मक प्रभाव दिखाई पड़ेंगे।
- आज आप अपने परिवार या आसपास के लोगों को देखेंगे तो आप पाएंगे कि वे मैच्योर होने के बावजूद सेक्स के बारे में बात करने से कतराते हैं। इसका एकमात्र कारण यही है कि आज भी लोग सेक्स जैसे मुद्दे पर बात करने से कतराते हैं और उन्हें सेक्स के बारे में पूर्ण जानकारी भी नहीं है, ऐसा सिर्फ इसलिए है क्योंकि अब तक भारत में सेक्स शिक्षा को स्कूलों में लागू करने के बारे में सोचा भी नहीं गया था।
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